चंडीगढ़ (प्रवेश फरण्ड)
‘‘केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कृषि संबंधी लाए काले कानूनों के खिलाफ आज पंजाब समेत देश भर के किसान आंदोलन कर रहे हैं, परंतु प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी किसानों की बात सुनने की बजाए अपने ‘मन की बात’ में इन काले कानूनों का गुणगान कर रहे हैं। इस से साफ है कि मोदी सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।’’ इन शब्दों का प्रगटावा रविवार को पार्टी हैडक्वाटर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने किया।
श्री मान ने देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कल शर्तें लगा कर किसानों को बातचीत के लिए बुलाए जाने के ब्यान पर टिप्पणी करते कहा कि गृहमंत्री किसानों को कह रहे हैं कि पहले हमारे पिंजरे में आओ फिर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री कह रहे हैं कि किसान पहले बुराड़ी जा कर प्रदर्शन करें फिर बात की जाएगी, यह शर्त क्यों लगाई गई? उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता किसान जहां बैठना चाहता है उसे वहीं बैठने दिया जाए और उनके साथ बिना किसी शर्त बात की जाए।
उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसानों ने हरियाणा पुलिस का अत्याचार बर्दाश्त करते हुए सभी रुकावटें तोड़ते हुए देश की राजधानी दिल्ली में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री किसान की बात सुनने की बजाए हैदराबाद के एम.सी चुनाव में व्यस्त हैं, इससे ज़्यादा गैरजिम्मेवार कौन हो सकता है? देश के किसान सडक़ों पर अपने हकों की पूर्ति के लिए भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं और भाजपा के मंत्री चुनाव को ज़्यादा महत्व दे रहे है। उन्होंने कहा कि बहुत दुख की बात है कि आज देश के लिए अन्न पैदा करने वाले किसान को सत्ता के अहंकार में भाजपा के मंत्री गुंडा व हुल्लबाज कह रहे हैं।
श्री मान ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने किसानों का अपमान किया है जो कह रहे हैं कि हरियाणा के किसान इस अंदोलन में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 18 जत्थेबंदियों के 80,000 किसान हरियाणा के हैं। उन्होंने कहा कि बीते दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ मुलाकात की थी, इस मौके केजरीवाल ने विश्वास दिलाया कि किसानों को उनकी सरकार की ओर से हर संभव सुविधा दी जाएगी, क्योंकि आम आदमी पार्टी खुद अंदोलनों में से निकली हुई पार्टी है और यह अंदोलन की भावनाओं को समझती है।

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