- -मोदी सरकार किसान मुद्दे को उलझाने में लगी, लोग-नुमाइंदों की बात सुनने से भी भागी
- संसद से सडक़ तक ‘आप’ आम लोगों की आवाज उठाती रहेगी
चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज किसानों की आवाज उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में आज संसद के सेंट्रल हॉल में नारेबाज़ी की। इस संबंधित चण्डीगढ़ में पत्रकारों को संबोधन करते हुए आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा ने कहा कि जब प्रधान मंत्री ने संसद के सेंट्रल हॉल में अपने जुमले बोलने शुरू किए तो ‘आप’ के संसद सदस्यों ने पिछले करीब एक माह से सर्द रातों में दिल्ली की सरहदों पर बैठे पंजाब, हरियाणा, यू.पी समेत देश के कोने-कोने से पहुंचे किसानों की आवाज मोदी तक पहुंचाने का यत्न किया, परंतु काले कानूनों की खिलाफ़त कर रहे इन किसानों की आवाज उठाने वाले संसद सदस्यों को नजऱअंदाज करते हुए मोदी वहां से खिसक गए। उन्होंने कहा कि संपूर्ण देश ने आज देख लिया कि 56 इंच की छाती का दावा करने वाले मोदी आम आदमी पार्टी के दो संसद सदस्यों के किसानों संबंधित सवालों से डर कर चुप्पी धार ली।
अरोड़ा ने कहा कि जिस तरह शहीद-ऐ-आजम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल हॉल असेंबली दिल्ली में बम फैंक कर अपनी आवाज गूंगी-बहरी ब्रिटिश हुकूमत तक पहुंचाई थी, उसी तरह ही देश की मिट्टी के सपूतों ने आज अन्नदाता की आवाज उठाने के लिए असेंबली में प्रधानमंत्री के सामने ही इन काले कानूनों को रद्द करने और किसानों को कम से कम समर्थन मूल्य देने की बात रखी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अब किसानों के साथ चि_ी-चि_ी और मीटिंग-मीटिंग खेल कर उनकी जायज मांगों से भटकाना चाहती है, परंतु उनको यह वहम है कि किसान अपनी मांगों को बिना मनवाए ही वापस चले जाएंगे।
मोदी खुद जानते हैं कि उनके कानूनों में बहुत कमियां हैं और इनके साथ किसानों को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला, इसी वजह से ही वह अपने गृह स्थान से 20 किलोमीटर दूर बैठे किसानों को मिलने से डरते हैं। बल्कि अपने चहेतों को किसानों का रूप देकर उनके साथ स्काइप और जूम के माध्यम से अपने मन की बात करके समय निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि डरपोक प्रधानमंत्री संसद का शीतकालीन सैशन करवाने से भी भागे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पर बरसते अमन अरोड़ा ने कहा कि अब जब देश के किसान काले कानूनों को वापस करवाने के लिए दिल्ली बॉर्डर में लम्बे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी समय प्रधानमंत्री मोदी पूंजीपतियों के इशारों पर इन कानूनों को सही साबित करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और उनके मंत्री किसानों के बारे में भ्रम फैला कर इस शांतिपूर्वक आंदोलन को खत्म करने पर लगे हुए हैं। मोदी सरकार को अपनी जिद्द छोड़ कर इन पूंजीपतियों का पक्ष लेने की बजाए देश के अन्नदाता के साथ खड़े होना चाहिए और इन काले कानूनों को तुरंत वापस लेना चाहिए।
आम आदमी पार्टी को अपने संसद सदस्यों पर गर्व है कि उन्होंने एक घमंडी शासक की आंखों में आंखें डाल कर आम किसानों की मांग को उठाया है। उन्होंने कहा कि वह उसी हाल में किसानों के हितैषी बनने वाली कांग्रेस के भी कुछ संसद मैंबर मौजूद थे, परंतु उन्होंने इस मुद्दे पर एक शब्द भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। कृषि प्रधान प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने फार्म हाऊस में बैठ कर आराम के साथ इस तमाशों को देख रहे हैं और कभी भी नरेंद्र मोदी के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने को ज़रूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के संसद सदस्यों और विधायकों की ओर से जंतर-मंतर पर धरने का नाटक करना असल में किसानों के आंदोलन को कमजोर करने की ही एक साजिश है। अकाली दल के प्रधान और संसद मैंबर सुखबीर बादल और उनकी धर्मपत्नी हरसिमरत बादल पर हल्ला बोलते अरोड़ा ने कहा कि वह तो इस किसान आंदोलन के दौरान लापता ही हो गए हैं, जबकि ‘आप’ के संसद मैंबर किसानों की आवाज को प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां कांग्रेस और अकाली दल नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक भी शब्द न बोलने का कारण है कि वह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिले हुए हैं और इस किसान आंदोलन को गलत रूप देकर खत्म करवाना ही उनका अंतिम लक्ष्य है। ‘आप’ को दूसरों की बी टीम कहने वाले कांग्रेस और अकाली दल वास्तव में दोगली नीति के तहत काम कर रहे हैं।

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