- कैप्टन ने पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात किया है उन्हें तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपने फार्म हाउस में बैठकर आराम करना चाहिए-भगवंत मान
- अपने बेटे को ईडी से बचाने के लिए कैप्टन किसानों से उनका अधिकार जबरदस्ती छीन रहे हैं - भगवंत मान
- किसान नेता रुलदु सिंह का कैप्टन सरकार पर लगाया गया आरोप सच साबित हुआ
चंडीगढ़
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जो शुरू से ही काले कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे हैं किसान आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, अब आंदोलन को दबाने के लिए नया तरीका ढूंढा है। वे पुलिस अधिकारियों से किसान नेताओं पर दबाव डलवाकर आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैप्टन ने सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के 2 आईपीएस ऑफिसर तैनात किए हैं। इन अधिकारियों को कहा गया है कि वे किसी भी तरह किसान नेताओं को कृषि कानून मानने को राजी करें और उन्हें मोदी सरकार के समक्ष झुकने को मजबूर करें।
'आप' मुख्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पार्टी के पंजाब अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने कहा कि कैप्टन ने अपने बेटे को ईडी से बचाने के लिए केंद्र से पंजाब के किसानों के हितों का समझौता किया है। उन्होंने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि कैप्टन की नीति किसानों की आवाज को दबाने वाली है। मान ने आगे कहा कि अमित शाह के साथ मीटिंग के बाद कैप्टन ने किसानों आंदोलन को दबाने वाले कई आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा किसान आंदोलन को तितर-बितर करने की नियत से कांग्रेस सांसदों ने पहले जंतर मंतर पर धरना दिया फिर कांग्रेस के सांसद रवनीत बिट्टू ने किसान नेताओं के खिलाफ बयान बाजी की और अब वेलोग आंदोलन को दबाने के लिए किसान नेताओं पर पुलिस अधिकारियों से जवाब डलवा रहे हैं।
मैंने कहा अमित शाह के साथ किसान नेताओं की बातचीत वाले दिन किसान नेता रुलदु सिंह ने कहा था कि उन्हें मीटिंग से पहले अधिकारियों द्वारा परेशान किया गया था, उन अधिकारियों में दो पंजाब के भी आईपीएस अधिकारी थे। आज रूलदु सिंह की बात सच साबित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। पहले वे काले कृषि कानूनों को लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई। और अब आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा किसान नेताओं पर दबाव डाल रहे हैं।
मान ने कहा बादल की तरह कैप्टन भी अपने बेटे को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं। वे आजकल कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं की बात न सुनकर अपने नया बॉस अमित शाह नरेंद्र मोदी की बात अपने अधिकारियों के माध्यम से सुन रहे हैं। अपने आप को किसानों का समर्थक के रूप में पेश करने के लिए उन्होंने पहले आंदोलन के समर्थन में बयान दिए और फिर अपने परिवार को बचाने के लिए भीतर ही भीतर केंद्र के साथ समझौता कर लिया। लेकिन यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि लोगों ने उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री बनाया था ना कि विश्वासघात करने के लिए।
मान ने आगे का कि कैप्टन ने पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। अब उन्हें एक मिनट भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर कुर्सी पंजाब के लोगों को सौंप देनी चाहिए।

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